मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 15
प्रदक्षिणात्रयं कृत्वा स्पृष्ट्वा सव्येन पाणिना । अष्टांगेन नमस्कुर्याद्‌गुरुपादसरोरुहम् ।।
अपने गुरु की तीन बार प्रदक्षिणा करके दाहिने हाथ से उनके शरीर का स्पर्श कर उनके चरण-कमलों में साष्टांग प्रणाम करना चाहिए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें