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शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 12
गुरुं सन्तोष्य यत्नेन य वै विद्यामुपासते । अवलम्बेन विद्यायास्तस्याः फलमवाप्नुयुः ।।
किन्तु जो विद्या गुरु की परितुष्टि से प्राप्त की जाती है वह शीघ्र ही सिद्धिदायिनी तथा सफलताकारिणी होती है।
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