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शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 115
एतदभ्यासशीलानां सर्वसिद्धिः प्रजायते । तस्माद्योगी प्रयत्नेन साधयेत् सिद्धमात्मनः ।।
इस प्रकार के अभ्यासशील साधक में समस्त सिद्धियाँ उत्पन्न हो जाती हैं। यह आसन परम गोपनीय है। इसे किसी अनधिकारी और अयोग्य व्यक्ति से नहीं बतलाना चाहिए।
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