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शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 114
एतदासनं श्रेष्ठं प्रत्यहं साधयेत् सुधीः । वायुः पश्चिममार्गेण तस्य संचरति ध्रुवम् ।।
क्योंकि इसके अभ्यासी का वायु पश्चिममार्गवाही होकर शरीर में संचरण करने लगता है। अतः प्रबुद्ध साधकों को प्रतिदिन इसका अभ्यास नियमपूर्वक करना चाहिए।
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