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शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 113
आसनोप्रमिदं प्रोक्तं भवेदनिलदीपनम् । देहावसानहरणं य पश्चिमोत्तानसंज्ञकम् ।।
इसी को उग्रासन कहां जाता है। इसके द्वारा वायु का प्रज्वलन तथा मृत्यु का भी निवारण होता है। इस आसन को पश्चिमोत्तान आसन के नाम से भी जाना जाता है,
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