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शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 111
पद्मासने स्थितो योगी प्राणापानविधानतः । पूरयेत्स विमुक्तः स्यात्सत्यं सत्यं वदाम्यहम् ।।
देवी पार्वती से शिवजी कहते हैं कि पद्मासन लगाकर अपने प्राण-अपान वायु को एकीकृत कर लेने वाला साधक निश्चय ही इस संसार-सागर से पार उतर जाता है।
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