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शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 108
यथाशक्त्या समाकृष्य पूरबेदुदरं शनैः । यथाशक्तत्यव पश्चात्तु रेचयेदविरोधतः ।।
तत्पश्चात् रेचक प्राणायाम द्वारा अवरुद्ध वायु को धीरे-धीरे निष्कासित कर दें। इसी प्रकार के अभ्यास को पद्मासन कहा जाता है।
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