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शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 104
येनाभ्यासवशात् शीघ्रं योगनिष्पत्तिमाप्नुयात् । सिद्धासनं सदाझेष्यं पवनाभ्यासिना परम् ।।
इस प्रकार के अभ्यास से शीघ्र ही योग का ज्ञान प्राप्त हो जाता है। इस आसन का प्रयोग वायुरोधी अभ्यासकर्ता के लिए परमावश्यक है।
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