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शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 1
हृदयस्ति पङ्कर्ज दिव्यं दिव्यलिंगेन, भूषितम् । कादिठान्ताक्षरोपेतं द्वादशार्णविभूषितम् ।।
प्रत्येक प्राणी के हत्प्रदेश में दिव्य चिह्नों से युक्त एक दिव्य कमल की अवस्थिति रहती है। यह कमल 'क' वर्ण से लेकर 'ठ' वर्ण तक बारह अक्षरों से शोभायमान रहता है। अर्थात् कमल में क्रमशः क, ख, ग, घ, ङ, च, छ, जझ, ञ, ट और ठं वर्ण उसकी बारह पंखुडियों पर नामांकित रहा करते हैं।
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