वह विशुद्ध दूध के समान कांतिवान् चन्द्रमा हर्षोल्लासपूर्वक अपने मण्डल से मेरु पर आकर इड़ा नाड़ी के छिद्रमार्ग से शरीर का पोषण करता है।
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