इस शरीर के परितोषणार्थ इड़ा नाम्नी नाड़ीपथ से जलरूपी मंदाकिनी प्रवहमान रहा करती है जिसके फलस्वरूप शरीर का अभिरक्षण तथा पोषण हुआ करता है।
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