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शिव संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 7
इडामार्गेण पुष्ट्यर्थं याति मन्दाकिनीजलम् । पुष्णाति सकलंदेहमिडामार्गेण निश्चितम् ।।
इस शरीर के परितोषणार्थ इड़ा नाम्नी नाड़ीपथ से जलरूपी मंदाकिनी प्रवहमान रहा करती है जिसके फलस्वरूप शरीर का अभिरक्षण तथा पोषण हुआ करता है।
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