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शिव संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 57
कामादयो विलीयन्ते ज्ञानादेव न चान्यथा । अभावे सर्वतत्त्वानां स्वयं तत्त्वं प्रकाशते ।।
ज्ञानोत्पत्ति होने पर काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद तथा मात्सर्य आदि सभी मनोविकार ज्ञान में विलीन हो जाते हैं और केवल आत्मज्ञान का आलोक ही शेष रह जाता है।
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