आत्मा के द्वारा आत्मदर्शन करने वाले ज्ञानवान पुरुष को जब कोई अन्य पदार्थ दिखलाई न दे तो उसे कर्मत्याग करने में कोई दोष नहीं होता, ऐसा मेरा अभिमत है।
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