मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिव संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 52
यदा कर्मार्जितं देहं निर्वाणे साधनं भवेत् । तदा शरीरवहनं सफलं स्यान्न चान्यथा ।।
अतः इस कर्मार्जित शरीर की विद्यमानता रहने तक मानव को मोक्षसाधन का मार्ग ढूंढ लेना चाहिए। यदि वह मुक्ति-साधना में अग्रसर न हो सके तो उसका जन्म लेना ही निरर्थक है। ऐसी स्थिति में वह धरती पर केवल भार-स्वरूप बना रहता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें