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शिव संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 42
ये ये कामादयो दोषाः सुखदुःखप्रदायकाः । ते ते सर्वे प्रवर्तन्ते जीवकर्मानुसारतः ।।
काम-क्रोधादि से उत्पन्न मानव-मन में होने वाली सुख-दुःख की अनुभूति का होना भी उसके कर्म का ही फल होता है। अर्थात् शुभ कर्मों द्वारा सुखोपलब्धि तथा अशुभ कर्मों द्वारा दुःखोपलब्धि का होना सुनिश्चित है।
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