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शिव संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 41
यद्यत्संदृश्यते लोके सर्वं तत्कर्मसम्भवम् । सर्वः कर्मानुसारेण जन्तुर्भोगान् भुनक्ति वै ।।
इस संसार में जितने भी शुभाशुभ कर्म दृष्टिगत होते हैं, उनका मूलभूत कारण केवल कर्म ही होता है। समस्त जीव अपने-अपने कर्मानुसार फलों को भोगते रहते हैं।
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