त्रैलोक्य (स्वर्ग, मर्त्य, पाताल) के समस्त प्राणी शरीरस्थ सुमेरु के आश्रित होकर अपने अपने कर्मों में लगे रहते हैं। जो पुरुष इन सब बातों को भली प्रकार से जान लेता है वही यथार्थ योगी समझा जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।