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शिव संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 38
नानाप्रकार नामानि स्थानानि विविधानि च । वर्तन्ते विग्रहे तानि कथितुं नैव शक्यते ।।
शेष सभी शास्त्रानुशीलन से जाने जा सकते हैं। सम्पूर्ण स्थानों एवं उनके नामों का कथन करना मेरे बल-बूते के बाहर है।
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