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शिव संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 37
ब्रह्माण्डसंज्ञकेदेहे स्थानानि स्युर्बहूनि च । मयोक्तानि प्रधानानि ज्ञातव्यानीह शास्त्रके ।।
इस ब्रह्माण्डसंज्ञक देह में अगणित स्थान विद्यमान हैं तथा उन स्थानों के अनेक नाम भी हैं, किन्तु मैंने कुछ प्रमुख स्थानों का ही वर्णन किया है।
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