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शिव संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 36
तस्माद्वैश्वानरग्निं च प्रज्वाल्य विधिवत्सुधीः । तस्मिन्नं हुनेद् योगी प्रत्यहं गुरुशिक्षया ।।
इस अग्नि को प्रज्वलित करने हेतु किसी सुयोग्य गुरु से दीक्षा लेने के पश्चात् इसमें अन्नाहुति देनी चाहिए। अर्थात् गुरु से ज्ञान प्राप्त कर मानव को संतुलित आहार ग्रहण करने चाहिए।
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