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शिव संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 35
आयुः प्रदायको वह्निर्बलं पुष्टिं ददाति सः । शरीर पाटवं चारि ध्वस्तरोगसमुद्भवः ।।
इसी वैश्वानर नामक अग्नि के फलस्वरूप आयु, बल और पुष्टि का वर्धन होता तथा इसी के द्वारा समस्त रोगों का विनष्टीकरण भी हो जाता है।
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