अन्या याऽस्त्यपरा नाडी मूलाधारात्समुत्थिताः ।
रसनामेढूनयनं पादाङ्गुष्ठे च श्रोत्रकम् ।।
इसके अतिरिक्त अन्य नाड़ियाँ मूलाधार से निकलकर जीभ, मेढ़, नेत्र, पैर के अंगुठे, कान,
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