पञ्चमस्थानं सुषुम्णाया नामानि स्युर्बहूनि च ।
प्रयोजनवशात्तानि ज्ञातव्यानीह शास्त्रतः ।।
इन्हीं छह स्थानों में छह कमल भी होते हैं जिसे मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपूर, अनाहत, विशुद्ध और आज्ञाचक्र कहा जाता है। इन सबका ज्ञान योगी अपने योगाभ्यास के द्वारा प्राप्त करता है। सुषुम्ना के भी पाँच स्थान और अनेक नाम बतलाये गये हैं जिसे आवश्यकता पड़ने पर शास्त्रों के द्वारा जाना जा सकता है।
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