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शिव संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 22
तस्मिन्नाधारपदरे च कर्णिकायां सुशोभना । त्रिकोणा वर्तते योनिः सर्वततरेषु गोपिता ।।
उस आधार पद्म की कर्णिका में एक त्रिकोणाकार योनि अवस्थित रहती है जिसे सभी शाखों ने परम गोपनीय कहा है। अर्थात् इसे किसी अयोग्य व्यक्ति से नहीं कहना चाहिए।
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