पञ्चवर्णोज्ज्वला शुद्ध सुषुम्णा मध्यरूपिणी ।
देहस्थोपाधिरूपा सा सुषुम्णा मध्यरूपिणी ।।
वह चित्रा नाड़ी पाँच वर्णों वाली, उज्ज्वल और विशुद्ध है। सुषुम्ना के बीच में अवस्थित वही चित्रा नाड़ी शरीर की उपाधि का मूलभूत कारण भी है।
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