तासां मध्ये गता नाडी चित्रा सा मम वल्लभा ।
ब्रह्मरन्ध्र च तत्रैव सूक्ष्मात् सूक्ष्मतरं शुभम् ।।
उन तीनों नाड़ियों के मध्य स्थित रहने वाली चित्रा नाड़ी मुझे परमप्रिय है, क्योंकि वहीं पर सूक्ष्म से भी सूक्ष्मतर ब्रह्मरन्ध्र की विद्यमानता होती है।
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