उक्त कथित त्रिनाड़ियों (पिंगला, इड़ा, सुषुम्ना) में सुषुम्ना नाड़ी ही सर्वोपरि होती है, क्योंकि यह योगियों के लिए परमप्रिय कही गयी है। इसके अतिरिक्त अन्य जितनी भी नाड़ियाँ है वे सभी शरीर में ही अवस्थित रहती है।
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