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शिव संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 15
वारुणालम्बुषा चैव विश्वोदरी यशस्विनी । एतासु तिस्रो मुख्याः स्युः पिङ्गलेडा सुषुम्णिका ।।
करुणा, अलम्बुषा, विश्वोदरी तथा यशस्विनी। इन चतुर्दश नाड़ियों में भी पिंगला, इड़ा और सुषुम्ना - इन तीनों की प्रमुखता होती है।
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