एक सत्तापूरितानन्दरूपः पूर्णो व्यापी वर्तत नास्ति किञ्चित् ।
एतज्ज्ञानं यः करोत्येव नित्यं मुक्तः स स्थान्मृत्युसंसारदुःखात् ।।
एक सत्ता से परिपूरित वह आत्मा ही सम्पूर्ण स्थानों में वर्तमान रहता है। उससे पृथक् कहीं कुछ भी नहीं है, जिसने ऐसा ज्ञान प्राप्त कर लिया है उसे ही जन्म-मरण के बन्धन से मुक्त समझना चाहिए। ऐसे ज्ञानी पुरुष को कभी दुःख की अनुभूति नहीं होती।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।