प्रमेयत्वादिरूपेण सर्वं वस्तु प्रकाश्यते ।
तथैव वस्तु नास्त्येव भासको वर्तकः परः ।।
संसार में प्रमेयस्वरूप अर्थात् जो कुछ भी दृष्टिगोचर होता है उसको प्रकाशमान करने वाला केवल एक आत्मा ही है।
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