सृष्टि के सम्बन्ध में विद्वानों ने इस प्रकार की कल्पना की है। संसार में सभी कुछ आत्मा से ही आविर्भूत है। अतएव आत्मा से भिन्न सभी वस्तुएँ काल्पनिक होती हैं। उसकी सत्यता को किसी ने भी स्वीकार नहीं किया है।
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