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शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 92
एवंरूपेण कल्पन्ते कल्पका विश्वसम्भवम् । तत्त्वात्तत्त्वं भवन्तीह कल्पनान्येन नोदिता ।।
सृष्टि के सम्बन्ध में विद्वानों ने इस प्रकार की कल्पना की है। संसार में सभी कुछ आत्मा से ही आविर्भूत है। अतएव आत्मा से भिन्न सभी वस्तुएँ काल्पनिक होती हैं। उसकी सत्यता को किसी ने भी स्वीकार नहीं किया है।
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