किन्तु जब यह रजोगुणप्रधान सरस्वती रूप धारण करती है तब ब्रह्मारूप चैतन्य का प्रादुर्भाव करती है। (अभिप्राय यह है कि तमोगुण की प्रबलता से यही शक्ति दुर्गास्वरूपा बनकर सृष्टि संहारक शिव को, सत्त्वगुण की बहुलता से सृष्टिपालक विष्णु को तथा रजोगुण की प्रधानता से सरस्वतीरूपा होकर सृष्टिरचयिता ब्रह्मा को उत्पन्न करती है। इस प्रकार इस शक्ति को ही जगत की उत्पत्ति, स्थिति तथा संहार में मूलभूत कारण माना गया है।)
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