मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 90
रजोगुणाधिका विद्या ज्ञेया सा वै सरस्वती । कश्चित्स्वरूपो भवति ब्रह्मा तदुपधारकः ।।
किन्तु जब यह रजोगुणप्रधान सरस्वती रूप धारण करती है तब ब्रह्मारूप चैतन्य का प्रादुर्भाव करती है। (अभिप्राय यह है कि तमोगुण की प्रबलता से यही शक्ति दुर्गास्वरूपा बनकर सृष्टि संहारक शिव को, सत्त्वगुण की बहुलता से सृष्टिपालक विष्णु को तथा रजोगुण की प्रधानता से सरस्वतीरूपा होकर सृष्टिरचयिता ब्रह्मा को उत्पन्न करती है। इस प्रकार इस शक्ति को ही जगत की उत्पत्ति, स्थिति तथा संहार में मूलभूत कारण माना गया है।)
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें