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शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 86
विक्षेपावरणाशक्तिर्दुरन्ता दुःखरूपिणी । जडरूपा महामाया रजः सत्त्वतमोगुणाः ।।
परमेश्वर की दो शक्तियाँ मानी गयी हैं - एक विक्षेप और दूसरा आवरण। ये शक्तियाँ अनन्त दुःखदायिनी होती हैं। माया को त्रिगुणात्मस्वरूपा (सत्त्व, रज एवं तम) कहा गया है।
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