मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 84
चैतन्यात्सर्वमुत्पन्नं जगदेतच्चराचरम् । अस्ति चेत्कल्पनेयं स्थानास्ति चेदस्ति चिन्मयम् ।।
यह समग्र चराचर जगत एक ही चैतन्य से आविर्भूत हुआ है, ऐसी कल्पना करने से संसार की सत्यता प्रतीत होती है, किन्तु संसार के न रह जाने पर उस शुद्ध चेतन आत्मा के सिवाय अन्य कुछ भी अवशिष्ट नहीं रह जाता।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें