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शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 83
रसो रसनया स्पर्शस्त्वचा संगृह्यते परम् । श्रोत्रेण गृह्यते शब्दो नियतं भाति नान्यथा ।।
जिह्वा से रस का ग्रहण, त्वचा से स्पर्श का ज्ञान तथा कर्णेन्द्रिय से शब्द का ग्रहण किया जाता है, यह नियम निश्चित और अकाट्य है।
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