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शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 80
शब्दैकगुणमाकाशं द्विगुणो वायुरुच्यते । तथैव त्रिगुणं तेजो भवन्त्यापश्चतुर्गुणाः ।।
इस प्रकार यह निश्चय हुआ कि आकाश में केवल एक शब्द गुण, वायु में दो गुण, अग्नि में तीन और जल में चार गुण हुआ करते हैं।
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