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शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 8
एवं व्यवसिता लोके कृत्याकृत्यविदो जनाः । व्यामोहमेव गच्छन्ति विमुक्ताः पापकर्मभिः ।।
इसी भाँति विधिनिषेध कर्मों (करणीय-अकरणीय कर्म) के मर्मज्ञ व्यक्ति पापकर्मों से विमुख रहकर भी माया के भ्रमजाल में पड़े रहकर पाप-पुण्य के अनुष्ठानरूप उक्त मतों का सहारा लेते रहते हैं।
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