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शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 79
गंधलाणिका पृथिवी नान्यथा भवति ध्रुवम् । विशेषगुणा स्फुरति यतः शास्त्रादिनिर्णयः ।।
पृथिवी में गन्ध का गुण होता है। इस प्रकार की निश्चयता में कुछ भी अन्यथा नहीं है। शास्त्रों के निर्णयानुसार ही पंचतत्त्वों में इन विशिष्ट गुणों का होना माना गया है।
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