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शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 77
आकाशाद्वायुराकाशः पवनादग्निसम्भवः । खेवाताग्नेर्जलं व्योमवाताग्नेर्वारितो मही ।।
इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि आकाश से वायु तथा आकाश-वायु के सम्मिलन से अग्नि की उत्पत्ति हुई। तदनन्तर आकाश, वायु अग्नि - इन तीनों के संयोग से जल एवं आकाश, वायु, अग्नि तथा जल के एकीकृत होने के परिणामस्वरूप पृथिवी का आविर्भाव हुआ।
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