स हि कामयते पुरुषः सृजते च प्रजाः स्वयम् ।
अविद्या भासते यस्मात्तस्मान्मिथ्या स्वभावतः ।।
आत्मा अपनी इच्छा से स्वयं ही जीवों की सृष्टि करता है। ऐसी इच्छा अविद्या के फलस्वरूप उत्पन्न होती है और वह स्वभावतः मिथ्या होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।