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शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 74
स हि कामयते पुरुषः सृजते च प्रजाः स्वयम् । अविद्या भासते यस्मात्तस्मान्मिथ्या स्वभावतः ।।
आत्मा अपनी इच्छा से स्वयं ही जीवों की सृष्टि करता है। ऐसी इच्छा अविद्या के फलस्वरूप उत्पन्न होती है और वह स्वभावतः मिथ्या होती है।
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