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शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 72
मायाविलसितं विश्वं ज्ञात्वैवं श्रुतियुक्तितः । अध्यारोपापवादाभ्यां लयं कुर्वन्ति योगिनः ।।
यह समस्त विश्व-प्रपंच माया के द्वारा विलसित है, ऐसा ज्ञान श्रुति-वाक्य से प्राप्त कर योगाभ्यासी अध्यारोप और अपवाद से आत्मविलीन रहते हैं।
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