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शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 70
अरिमित्रमुदासीनस्त्िविधं स्यादिदं जगत्‌ । व्यवहारेषु नियतं दृश्यते नान्यथा पुनः । प्रियाप्रियादिभेदस्तु वस्तुषु नियतस्फुटम् ।।
इस संसार में मुख्यतः तीन प्रकार के व्यवहार परिलक्षित होते हैं, जैसे - शत्रु, मित्र और उदासीन। इससे विलग अन्य कुछ भी नहीं है। यह समस्त संसार प्रियता-अप्रियता भेदरूप बन्धन में जकड़ा हुआ है।
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