इस संसार में मुख्यतः तीन प्रकार के व्यवहार परिलक्षित होते हैं, जैसे - शत्रु, मित्र और उदासीन। इससे विलग अन्य कुछ भी नहीं है। यह समस्त संसार प्रियता-अप्रियता भेदरूप बन्धन में जकड़ा हुआ है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।