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शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 7
मन्रयोगं प्रशंसन्ति केचित्तीथनुसेवनम्‌ । एवं बहूनुपायास्तु प्रवदन्ति विमुक्तये ।।
कुछ विद्वानों के मतानुसार मन्त्रजाप तथा तीर्थस्थान का भ्रमण करना ही मोक्ष का कारण बनता है। इस प्रकार अपने-अपने अभिमत के अनुसार लोगों ने मुक्ति के अनेक साधन बतलाये हैं।
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