मन्रयोगं प्रशंसन्ति केचित्तीथनुसेवनम् ।
एवं बहूनुपायास्तु प्रवदन्ति विमुक्तये ।।
कुछ विद्वानों के मतानुसार मन्त्रजाप तथा तीर्थस्थान का भ्रमण करना ही मोक्ष का कारण बनता है। इस प्रकार अपने-अपने अभिमत के अनुसार लोगों ने मुक्ति के अनेक साधन बतलाये हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।