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शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 68
मयैवं विश्वजननी नान्या तत्वधिया परा । यदि नाश समायाति विश्वं नास्ति तदा खलु ।।
इस सम्पूर्णं जगत की जनयित्री माया को माना गया है, क्योकि उसके द्वारा ही विश्वोत्पत्ति सम्भव है। इसके अतिरिक्त अन्य कोई कारण नहीं है, यह बात सुनिश्चित है। अतः आत्मबोध होने पर इस नाशवान विश्च की पूर्णरूप से परिसमप्ति हो जाती है।
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