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शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 65
न खं वायुर्न चाग्निश्च न जलं पृथिवी न च । नैतत्कायै नेश्चरादि पूर्णकात्मा भवेत्खलु ।।
आत्मा अकाशरहित होने के परिणामस्वरूप निःशब्द, वायु के अभाव से स्पर्शहीन, अग्नि के अभाव से तेजहीन, जलविहीन होने के कारण रसहीन तथा पृथिवीतत्त्व के अभाव में गंधहीन भी है।
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