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शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 64
बाह्यानि सर्वभूतानि विनाशं याति कालतः । तो वाचो निवर्तन्ते आत्मा दैतविवर्जितः ।।
आत्मा से अलग जो भी पदार्थ होते हैँ वे सभी समयानुसार नाश को प्राप्त हो जाया करते है। अतः आत्मा द्वैधीभाव से रहित है। उसे वाणी द्वारा व्यक्त नहीं किया जा सकता।
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