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शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 63
कालतो विविधं विश्वं यदा चैव भवेदिदम्‌ । तदेकोऽस्ति स एवात्मा कल्यनापथवर्जितः ।।
कालानुसार अनेक रूपों वाले संसार की उत्पत्ति होती है, अतः वह एक प्रकार का आत्मा ही है । इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि आत्मा कोई काल्पनिक वस्तु न होकर सत्यस्वरूप है।
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