केचिदगृहस्थकर्माणि प्रशंसन्ति विचक्षणाः ।
अग्निहोत्रादिक कर्म तथा केचित्परं विदुः ।।
कुछ बुद्धिमान पुरुष गार्हस्थ्य धर्म तथा अग्निहोत्र कर्म (आवासस्थल में निरन्तर अग्नि जलाये रखना) के प्रशंसक होते है।
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