यस्मान्न विद्यते नाशः पञ्चभूतैर्वृथात्पकैः ।
तस्मादात्मा भवेत्नित्यस्तन्नाशो न भवेत्खलु ।।
पंचभूतों के नष्ट हो जाने पर भी इस आत्मा का विनाश नहीं होता, क्योकि आत्मा सर्वदा ही आविनश्वर और अविकारी होता है। किसी भी अवस्था में आत्मा का नाश होना असम्भव है।
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