मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 52
घटस्याभ्यन्तरे बाह्य यथाकाशं प्रवर्तते । तथात्माभ्यन्तरे बाह्यो ब्रह्माण्डस्य प्रवर्तते ।।
जिस प्रकार घट के अन्दर और बाहर आकाश परिव्याप्त रहा करता है उसी प्रकार सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के अन्तरंग और बहिरंग भाग मेँ केवल एक आत्मा ही पूर्णतया परिव्याप्त रहती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें